आम के 6 पेड़ थे
यहीं बताते थे पापा, हर बार
दो मेरे, दो छोटे भाई के, एक उनका
और एक माँ का पेड़।
स्टेशन से घर के बीच में
हर बार दिखाते थे
कभी तीन चौसा, दो दशहरी एक आम्रपाली
कभी तीन आम्रपाली एक चौसा दो दशहरी
कभी नहीं देखे
कभी नहीं चढ़े
घर की जल्दी में
शहर के ही खायें आम
माना की ये है, छः पेड़ वहीं
एक टूट कर बिका है, अभी
बूढ़ा आम पेड़
अब बस यहीं,
किसके हिस्से का पेड़
जो बूढ़ा हुआ, टूट गया और बिक गया।
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