बचपन में दूध लाने पर बचे छुट्टे पैसों की तरह ज़िंदगी की ये कुछ छुट्टी कविताएँ हैं ।
सब शुरू होने की संभावनाओ में,
एक
जगह थी।
जगह से दो लो की जगह दूर थी।
कोई एक कहूँगा साथ चलेंगे, मैं अकेला नही जाना चाहता पहाड़। अकेले देखे जाने का डर, हमेशा लगता है, पहाड़ को। हम जब भी मिले, कोई एक को लेकर म...
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