19 का पहाड़ा
तुम्हे याद करना
19 के पहाड़े जितना कठिन हैं
और भूल जाना है
जैसे माँ जरूरी बताया हुआ कोई काम
तुम्हे छुआ तो जाना balance sheet tally कर लेने से भी और बहुत सुख बाकी है दुनिया मे
पर एक सुबह तुम आसानी से उठकर चली गई
बस उतनी ही आसानी से मैंने 2 का पहाड़ा याद किया था।
प्रेम कविता
कितनी ही प्रेम कविताएँ
प्रेम पत्र बनकर
किताबों में मर गई या जला दी गई।
नासमझ
तुम्हारे जाने का कारण उतना ही नासमझ हैं
जितना बचपन की की ये बहस
अगर पृथ्वी घूमती हैं
तो हम क्यों नही घूमते।
इंतज़ार
फिर काटे गए हज़ारो पेड़
सैंकड़ो बनाए गए उनके कागज़
पचासों लिखी उन पर चिट्ठियां।
स्याही से रंगे हाथों ने
करोड़ो बार लिखा उन पर प्रिय/ प्रियवर
और फिर गलत पते पर भेजकर
मरते दम तक किया हमने इंतज़ार।

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